Wednesday, February 27, 2019

दूसरा टी-20 आज, भारत हारा तो घर में पहली बार ऑस्ट्रेलिया से सीरीज गंवाएगा

खेल डेस्क. भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच दो मैच की सीरीज का आखिरी टी-20 बुधवार को बेंगलुरु में शाम सात बजे से खेला जाएगा। भारत पहले टी-20 में तीन विकेट से हार गया था। ऐसे में उसे सीरीज बचाने के लिए हर हाल में यह मैच जीतना ही होगा। यदि वह ऐसा नहीं कर पाया तो वह घरेलू मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहली बार टी-20 सीरीज हारेगा। ओवरऑल बात करें तो भारत 2008 के बाद से ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कोई भी टी-20 सीरीज नहीं हारा है। उसके बाद से भारत ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच टी-20 सीरीज खेलीं। इनमें से उसने दो जीतीं और तीन ड्रॉ कराईं।

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अब तक 7 द्विपक्षीय टी-20 सीरीज हुईं हैं। इनमें से भारत ने तीन जीती हैं, जबकि एक गंवाई हैं। तीन सीरीज ड्रॉ रही हैं।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ यह मैच हारने पर भारत इस साल लगातार दूसरी टी-20 सीरीज हार जाएगा। न्यूजीलैंड ने इसी महीने भारत के खिलाफ तीन टी-20 की सीरीज 2-1 जीती थी। टीम इंडिया ने पहला इंटरनेशनल टी-20 2006 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेला था। पिछले 13 साल में सिर्फ एक बार टीम इंडिया लगातार दो टी-20 सीरीज हारी है। आखिरी बार 2011 में भारत को इंग्लैंड से लगातार दो सीरीज में हार मिली थी।

बेंगलुरु में भारत का सक्सेस रेट 60%

भारत ने बेंगलुरु के इस मैदान पर अब तक पांच टी-20 मैच खेले हैं। इसमें उसे तीन में जीत और दो में हार मिली है। हालांकि इस मैदान पर खेले गए पिछले दो टी-20 मैचों में उसे जीत मिली है।

मध्यक्रम को उठानी होगी जिम्मेदारी

रविवार को विशाखापट्टनम में खेले गए पहले टी-20 मैच में मेजबान टीम का मध्यक्रम पूरी तरह से फ्लॉप रहा था। भारत ने मैच में सात विकेट पर 126 रन बनाए थे। उसके सिर्फ तीन ही बल्लेबाज लोकेश राहुल (50), महेंद्र सिह धोनी (नाबाद 29) और कप्तान विराट कोहली (24) ही दहाई के आंकड़े तक पहुंच पाए थे। ऐसे में दूसरे टी-20 में भारतीय मध्यक्रम को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।

लो-स्कोरिंग मैच होने के बावजूद पहले टी-20 में भारतीय गेंदबाजों का प्रदर्शन शानदार रहा था। यही वजह रही थी कि ऑस्ट्रेलिया को 127 रन का लक्ष्य हासिल करने के लिए आखिरी गेंद तक का इंतजार करना पड़ा था। टीम प्रबंधन को अपने गेंदबाजों से दूसरे टी-20 में भी ऐसे ही प्रदर्शन की उम्मीद होगी।

दोनों टीमें इस प्रकार हैं
भारत : विराट कोहली (कप्तान), रोहित शर्मा, लोकेश राहुल, शिखर धवन, ऋषभ पंत, दिनेश कार्तिक, महेंद्र सिंह धोनी, कृणाल पंड्या, विजय शंकर, युजवेंद्र चहल, जसप्रीत बुमराह, उमेश यादव, सिद्धार्थ कौल और मयंक मार्कंडेय।

ऑस्ट्रेलिया : एरॉन फिंच (कप्तान), डी आर्सी शार्ट, पैट कमिंस, एलेक्स कैरी, जेसन बेहरेनडोर्फ, नाथन कूल्टर नाइल, पीटर हैंड्सकॉम्ब, उस्मान ख्वाजा, नाथन लियोन, ग्लेन मैक्सवेल, झाय रिचर्डसन, केन रिचर्डसन, मार्क्स स्टोइनिस, एश्टन टर्नर और एडम जम्पा।

Thursday, February 21, 2019

राफेल पर फैसले की होगी समीक्षा? जल्द सुनवाई पर विचार करेगा SC

राफेल विमान सौदे का मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर पहुंचा है. वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में राफेल मामले के फैसले पर पुनर्विचार याचिकाओं का मुद्दा उठाया. जिसपर सुनवाई करने के लिए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने विचार करने को कहा है. चीफ जस्टिस ने कहा है कि वह सभी लंबित याचिकाओं की लिस्टिंग पर विचार कर रहे हैं, साथ ही इसके लिए एक नई बेंच का गठन भी किया जाना बाकी है.

आपको बता दें कि राफेल विमान सौदे में कथित गड़बड़ी को लेकर पहले भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. अपने पिछले फैसले में कोर्ट से केंद्र सरकार को राहत मिली थी, लेकिन कुछ टाइपिंग की गलती होने के कारण फैसला विवादों में आ गया था. अब एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में राफेल सौदे से जुड़ी कई याचिकाएं दायर की गई हैं.

पहले खारिज हो चुकी हैं याचिका

बता दें कि संबंधित याचिकाओं के समूह को सुप्रीम कोर्ट ने 14 जनवरी को खारिज कर दिया था. इस समूह में पूर्व केंद्रीय मंत्रियों यशवंत सिन्हा और अरूण शौरी तथा वकील प्रशांत भूषण की याचिकाएं भी थीं. तब न्यायालय ने कहा था कि फ्रांस से 36 राफेल विमानों की खरीद में केंद्र की निर्णय लेने की प्रक्रिया पर संदेह का सवाल ही नहीं उठता.

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि राफेल मुद्दे पर 4 आवेदन या याचिकाएं दाखिल की गई हैं और इनमें से एक तो अब तक खामी की वजह से रजिस्ट्री में पड़ी है. इस पीठ में न्यायमूर्ति एल एन राव और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना भी हैं.

जब प्रशांत भूषण ने राफेल मामले में याचिकाओं को तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग की तब पीठ ने कहा ‘‘पीठ (के न्यायाधीशों) में बदलाव करना होगा, यह बहुत मुश्किल है. हमें इसके लिए कुछ करना होगा.

प्रशांत भूषण ने कहा कि समीक्षा याचिकाओं के अलावा एक ऐसा आवेदन भी दाखिल किया गया है जिसमें अदालत को गुमराह करने वाली जानकारी देने के लिए केंद्र सरकार के कुछ कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की गई है.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में वकील प्रशांत भूषण के अलावा पूर्व बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी ने उच्चतम न्यायालय से सोमवार को हाईप्रोफाइल राफेल मामले में सीलबंद लिफाफे में ‘‘झूठी या भ्रामक’’ जानकारी कथित तौर पर देने के लिए केंद्र सरकार के कुछ कर्मचारियों के खिलाफ झूठे साक्ष्य का मुकदमा शुरू करने का आग्रह किया.