लक्षद्वीप के पूर्व प्रशासक वजाहत हबीबुल्लाह और आईएनएस विराट के पूर्व कमांडिंग ऑफ़िसर रिटायर्ड वाइस एडमिरल विनोद पसरिचा ने इस आरोप को सिरे से ख़ारिज कर दिया है कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इस युद्धपोत का इस्तेमाल निजी टैक्सी के तौर पर किया था.
जम्मू-कश्मीर कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी वजाहत हबीबुल्लाह ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई को बताया, "मैं प्रधानमंत्री कार्यालय में था. मैं इंदिरा गांधी के कार्यकाल में निदेशक था. जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने तो मुझे संयुक्त सचिव बनाया गया था. उनके साथ मैंने तीन साल काम किया. केंद्र सरकार में मेरा कार्यकाल समाप्त होने के बाद मेरा तबादला लक्षद्वीप में हो गया था."
वो कहते हैं, "राजीव गांधी जब वहां आए थे तो वो 'आइलैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी' की बैठक में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री की हैसियत से आये थे. उनके साथ पूरा कैबिनेट वहां आया था. कवरत्ती में इसकी बैठक थी."
वो कहते हैं, "प्रधानमंत्री की जो छुट्टी हुई थी वो दिल्ली से कोचिन तक अपने जहाज से आए थे. वहां से कवरत्ती वो हेलिकॉप्टर से आए थे. मेरे पास वो तस्वीर है. जनता उनका स्वागत करते हुए नाच रही थी. पूरे कैबिनेट के यहां पहुंचने के बाद राजीव गांधी यहां पहुंचे थे."
आईएनएस विराट के इस्तेमाल पर वजाहत हबीबुल्लाह कहते हैं कि यह सरासर झूठ है. हालांकि वो कहते हैं कि उस दौरान आईएनएस विराट वहां ज़रूर था, लेकिन वो उनकी सुरक्षा की वजह से वहां था. साथ ही वो कहते हैं कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर क्या-क्या इंतजाम किये जाते हैं इसके बारे में हम कभी बात नहीं करते हैं.
राजीव गांधी के साथ छुट्टी मनाने के लिए कौन कौन आए थे. इस पर वजाहत हबीबुल्लाह ने कहा, "सोनिया गांधी, उनके दोनों बच्चे राहुल और प्रियंका, अमिताभ बच्चन, जया बच्चन उनके बच्चे अभिषेक और श्वेता, कपूरथला घराने के ब्रिज और उनकी पत्नी, सोनिया जी की बहन, बहनोई और उनकी मां. लेकिन ये सब उसमें नहीं आए थे जिस हेलिकॉप्टर में राजीव गांधी आए थे. और न ही आईएनएस विराट में. ये सब कवरत्ती में आए और वहां से मैंने उनको भेजा बंगाराम द्वीप."
वहीं रिटायर्ड वाइस एडमिरल विनोद पसरिचा ने भी इस बात को सिरे से ख़ारिज कर दिया है कि राजीव गांधी ने अपने दोस्तों और इतालवी सास के लिए इसका निजी इस्तेमाल किया था.
वे दिसंबर 1987 में विराट के कमांडिंग ऑफिसर थे, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इसकी सवारी की थी.
उन्होंने भारतीय न्यूज़ चैनलों से कहा, ''राजीव गांधी तब सरकारी काम से लक्षद्वीप गए थे. आईलैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी की एक बैठक थी और राजीव गांधी इसी में शामिल होने पहुंचे थे. राजीव गांधी कोई फैमिली ट्रिप पर नहीं आए थे. राजीव गांधी के साथ उनकी पत्नी सोनिया गांधी, बेटे राहुल गांधी और आईएएस अधिकारी थे.''
पसरिचा ने इस बात से इनकार किया है कि युद्धपोत में राजीव गांधी के साथ अमिताभ बच्चन और सोनिया गांधी के माता-पिता थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर इस युद्धपोत का निजी टैक्सी के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था.
मोदी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में एक चुनावी रैली में यह भी दावा किया था कि इसमें राजीव गांधी के साथ उनकी सास और अमिताभ बच्चन भी थे. पसरिचा ने कहा कि राजीव गांधी के अलावा सोनिया, राहुल और दो आईएएस अधिकारी थे. उन्होंने सेना के राजनीतीकरण करने को दुर्भाग्यपूर्ण और अस्वीकार्य बताया.
पसरिचा ने कहा है, ''हमलोग त्रिवेंद्रम से चले थे. तब कई द्वीपों पर राजीव गांधी बैठकों के लिए गए थे. राजीव गांधी ने तीन द्वीपों का दौरा हेलिकॉप्टर से किया था.'' एडमिरल एल रामदास वेस्टर्न फ्लीट के कमांडर इन-चीफ़ थे और तब वो राजीव गांधी के साथ थे. एडमिरल रामदास का भी कहना है कि राजीव गांधी ने विराट का इस्तेमाल सरकारी दौरे के लिए किया था न कि फैमिली ट्रिप के लिए.
एडमिरल रामदास ने पूरे विवाद पर एनडीटीवी से कहा, ''नौसेना सैर करने के लिए नहीं बनी है और न हम ऐसा करते हैं. हमारी आदत है कि जो भी अतिथि के तौर पर आता है उसका ठीक से देखभाल करते हैं. हमारे प्रधानमंत्री लक्षद्वीप में आईलैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी की बैठक के लिए आए थे. हमारे वेस्टर्न फ्लीट उस इलाक़े में तो पहले से थी ही. जब विक्रमदित्य आया तो अभी के प्रधानमंत्री गए थे. इनके साथ कई लोग थे. राजीव गांधी का दौरा भी सरकारी था. हमलोग लड्डू-पेड़ा बाँटने नहीं गए थे. ये तो सेना की बदनामी कर रहे हैं. ये युद्धपोत को टैक्सी की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगा रहे हैं. मुझे तो लग रहा है कि अभी ही इस्तेमाल किया जा रहा है. हमने राजीव गांधी को त्रिवेंद्रम से साथ लिया था और उन्होंने चार से पाँच द्वीपों का दौरा किया था.''
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